अति नक्सल प्रभावित नगवां विकास खंड के पूर्व प्रमुख राजेंद्र देहाती द्वारा वर्तमान प्रमुख प्रवीन सिंह पर आय से अधिक संपत्ति रखने का आरोप लगाने के बाद प्रवीन सिंह का जो बयान आया है उससे तमाम लोग अवाक हैं । प्रमुख ने उनके आरोप पर अपना जो वक्तव्य दिया है उसके अनुसार प्रमुख के पास विहार में सवाँ १०० बीघे उपजाऊ जमीं है । उसी जमीन की उपज से अर्जित किए गए धन से वर्तमान की सारी संपत्ति हासिल की गई है । लोगो का कहना है की अगर इन्होंने पैतृक संपत्ति से सोनभद्र के मेहुणी गाँव में लाखो की३६ बीघे जमीन व भव्य हवेली बनवा रहे है तो आज से ४ साल पूर्व उनके द्वारा कही भी कोई सम्पत्ति क्यो नही अर्जित की गई क्या प्रमुख बनने के बाद उनकी उपजाऊ जमीन अचानक धन का वर्षा करने लगी ।
नगवां विकास खंड आज भी मूलभूत सुविधाओं से वंचित है , अगर नगवां प्रमुख ने क्षेत्र में विकास की गंगा बहाई होती तो लोक सभा चुनाव में सत्ता पक्ष का कार्यकर्ता होने के बाद उनके क्षेत्र के कुरवल गावं के लोग विकास न होने की बात करते हुए चुनाव का बहिस्कार नही करते। जबकि उस गावं में सर्वाधिक संख्या अनुसूचित जाती की थी । इसके अलावा पिछले एक साल में हुई शिकायतों का लेखा जोखा तैयार किया जाय तो नरेगा में धाधली व मजदूरी भुगतान न होना फर्जी मस्टरोल तैयार कराना आदि प्रमुख शिकायते रहीं है । अकेले सिर्फ़ वित्तीय वर्ष २००८-०९ में जेट्रोफा के रोपण व अन्य पेड़ों को लगवाने के नाम पर लगभग ५० लाख रुपये खर्च किए गए हैं । इसे पुरी तरह फर्जी करार देते हुए सामाजिक कार्यकर्ता राजेश्वर तिवारी कई बार लिखित शिकायत उच्चाधिकारियों से कर चुके हैं । इसी तरह दर्जन भर से अधिक बंधियों व कई चेकडैम व संपर्क मार्ग जिन पर अब तक कई करोण रुपये खर्च किए जा चुके हैं उनकी उपयोगिता मौके पर जाकर देखी जा सकती है । पूर्व प्रमुख राजेंद्र देहाती दावा करते है की अगर विकास का सच देखना हो तो प्रशासन पारदर्शिता के लिए मौके पर चले । झरिया, कुसुमदाहा , चकरिया , पिंडारी, बसुहारी व अमिलाधाम जैसे अति नक्सल प्रभावित गावों में कराये गए कार्य देखे जा सकते है । यह गाँव स्वंम प्रमुख की देख रेख में संचालित होते है । अगर सही जांच हो जाए तो हवेली की तस्वीर स्वतः साफ हो जायेगी । यह सिर्फ़ वर्तमान प्रमुख ही नही बल्कि तमाम वर्तमान व निवर्तमान लोगो का चेहरा उजागर कर देगा । सोनभद्र के नगवां विकास खंड में नरेगा व अन्य शासन की संचालित योजनाओं के साथ जिस तरह का मजाक किया जा रहा है उसे रोकने की कवायद अभी तक पुरी निष्ठा से नही की गई ।
वर्तमान जिलाधिकारी पंधारी यादव ने पहल तो शुरू की है लेकिन उनकी आँख व कान के रूप में मौजूद अंगद की तरह पाँव जमाये विकास विभाग के कुछ कर्मचारी उन्हें सही तस्वीर न दिखा कर गुमराह करने का काम कर रहे हैं ।
ग्राम पंचायतों के माध्यम से लगवाये गये केकराही , पलिया,बहुआर, विकास भवन के सामने लोढ़ी में लगाये गये ६० से लेकर ८० प्रतिशत तक वृक्ष वर्तमान में मौजूद हैंं। यह वृक्ष आने वाले दिनों में एक उदाहरण प्रस्तुत करेंगे।इसी तरह क्षेत्र पंचायत की कई ग्राम पंचायतों में खेत, तालाब व बन्धी तथा उपयोगी चेकडैमों के निर्माण से किसानों की सिंचाई की समस्या का समाधान किया जा रहा है। क्षेत्र पंचायत प्रमुख कमला कान्त पाण्डेय का कहना है कि क्षेत्र के विकास के लिए आये धन का सदुपयोग हो इसकी बराबर निगरानी की जाती है। १०४ ग्राम पंचायतों में नरेगा के धन का सदुपयोग हो इसके लिए खण्ड विकास अधिकारी प्रतिदिन सक्रिय रहते है। जहां भी किसी बात की शिकायत मिलती है मौके पर पहुंचकर उसका समाधान किया जाता है। विकास से जुड़े सभी ब्लाक के समस्त कर्मचारियों से हमेशा इस बात को याद कराया जाता रहता है कि किसी भी मजदूर की मजदूरी का बकाया प्राथमिकता के आधार पर किया जाय। खण्ड विकास अधिकारी राघवेन्द्र तिवारी ने बताया कि इस बात को काफी गंभीरता से लिया जाता है कि धन का समुचित सदुपयोग हो। समस्त ग्राम प्रधानों व ग्राम विकास अधिकारियों , पंचायत सचिवों को प्रतिदिन निर्देश दिये जाते है कि अधिक से अधिक मजदूर परिवार लाभान्वित हों, नरेगा के लिये ग्राम
चायतों
निर्माण में पूरी पारदर्शिता बरती जाती है। फर्जी मस्टरोल भरे जाने की शिकायत पर तत्काल जॉंच कर सही मजदूरी का भुगतान किया जाता है। 